छोटा जवाब
हां, हाउसिंग सोसाइटी Airbnb जैसे शॉर्ट स्टे को सीमित या बैन कर सकती है, लेकिन जनरल बॉडी के जरिए, अकेली कमेटी के फैसले से नहीं। अब तक का सबसे मजबूत समर्थन बॉम्बे हाईकोर्ट के दो फैसलों से मिला है। देशभर में सोसाइटियों में Airbnb पर रोक लगाने वाला कोई राष्ट्रीय कानून नहीं है, और पूरे देश के लिए मामला तय करने वाला कोई एक सुप्रीम कोर्ट फैसला भी नहीं है। इसलिए जवाब आपके राज्य और आपके रजिस्टर्ड बायलॉज पर निर्भर करता है।
यह पोस्ट मुख्य रूप से महाराष्ट्र की को-ऑपरेटिव सोसाइटियों के लिए है। अगर आप दिल्ली NCR, बेंगलुरु या कहीं और हैं, तो आपकी सोसाइटी या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन दूसरे कानून के तहत चलती है। सिद्धांत वही रहता है, पर प्रक्रिया अलग होती है।
फैसला 1: जनरल बॉडी शॉर्ट-टर्म रेंटल को सीमित कर सकती है
20 दिसंबर 2024 के फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस शर्मिला देशमुख ने महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट की धारा 91 के तहत एक विवाद सुना। भारतीय फ्रेंड्स को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के सदस्य महेश के. मेहता ने उन रेजोल्यूशनों को चुनौती दी थी जो सदस्यों को Airbnb और बेड एंड ब्रेकफास्ट योजनाओं के लिए फ्लैट इस्तेमाल करने से रोकते थे।
कोर्ट ने सोसाइटी का पक्ष लिया। उसने कहा कि जनरल बॉडी ऐसी गतिविधियों को रोक सकती है जो सदस्यों के सामूहिक हित के खिलाफ हों, भले ही कानून या लीज में उन पर साफ मनाही न हो। सदस्य का बेड एंड ब्रेकफास्ट लाइसेंस भी रिन्यू नहीं हुआ था, जिससे उसका पक्ष और कमजोर हुआ। कोर्ट ने यह भी कहा कि रेजोल्यूशन तब तक बाध्यकारी रहता है जब तक कोई सक्षम फोरम उसे रद्द न कर दे।
फैसला 2: सीधे हाईकोर्ट मत भागिए
दिसंबर 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस सुमन श्याम और एस. एम. मोडक) ने एक ऐसे सदस्य की याचिका सुनी जो एजेंसियों और Airbnb जैसे वेब पोर्टलों के जरिए अपने फ्लैट में पेइंग गेस्ट रखना चाहता था। सोसाइटी और उसके सदस्य इसके लिए तैयार नहीं थे।
कोर्ट ने यह तय नहीं किया कि बैन सही है या नहीं। उसने कहा कि को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के खिलाफ अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका चलने योग्य नहीं है, क्योंकि सोसाइटी एक निजी संस्था है। सदस्य को को-ऑपरेटिव कोर्ट जाने की छूट दी गई। कमेटियों के लिए व्यावहारिक सबक यह है कि असहमत सदस्य को सही फोरम में लड़ना होगा, और तब तक आपका रेजोल्यूशन कायम रहता है।
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मुफ़्त में शुरू करेंसोसाइटियों के पास ठोस आधार क्यों है
फ्लैट एक सदस्य की आवासीय संपत्ति है, लेकिन वह एक साझा इमारत के भीतर है। शॉर्ट स्टे से गेट, लिफ्ट और पार्किंग में अनजान लोगों की लगातार आवाजाही रहती है। सोसाइटियां बार-बार चार चिंताएं उठाती हैं:
- सुरक्षा, क्योंकि सोसाइटी को पता नहीं होता कि कौन कितने दिन रुक रहा है।
- लिफ्ट, कॉमन एरिया और सुविधाओं की घिसाई, जिसका खर्च बाकी सदस्य उठाते हैं।
- शोर, पार्टी और पड़ोसियों को परेशानी, खासकर परिवारों और वरिष्ठ नागरिकों को।
- बीमा और जिम्मेदारी, अगर कोई मेहमान कॉमन एरिया में घायल हो या नुकसान करे।
सोसाइटी क्या नहीं कर सकती
बैन की सीमाएं हैं, और बुरी तरह लिखा गया बैन आसानी से चुनौती में आ जाता है। ये बातें ध्यान रखें:
- कमेटी अकेले Airbnb बैन नहीं कर सकती। इसके लिए जनरल बॉडी का रेजोल्यूशन चाहिए, और स्थायी नियम के लिए रजिस्ट्रार के पास रजिस्टर्ड बायलॉज संशोधन।
- शॉर्ट स्टे पर रोक का मतलब किराएदारों पर रोक नहीं है। रेंट या लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट वाला सामान्य लंबी अवधि का किराएदार अलग बात है। किराएदार के लिए सोसाइटी नॉन-ऑक्यूपेंसी चार्ज ले सकती है, जो महाराष्ट्र में अब सर्विस चार्ज के 10% तक सीमित है।
- नियम सब पर बराबर लागू होना चाहिए। जो रेजोल्यूशन चुपचाप कमेटी सदस्यों को छूट दे, वह टिकेगा नहीं।
- जुर्माने बायलॉज या एक्ट से आने चाहिए। सोसाइटी अपने मन से जुर्माना नहीं गढ़ सकती, और पालन कराने के लिए पानी या बिजली नहीं काट सकती।
नोएडा, बेंगलुरु और दूसरे शहरों का क्या
हमें इन शहरों में ऐसा कोई कोर्ट फैसला नहीं मिला जो सवाल तय करता हो, और किसी राज्य कानून में अपार्टमेंट में Airbnb पर सीधी रोक भी नहीं है। जो है वह सोसाइटी की अपनी शक्ति है, बायलॉज और रेजोल्यूशन के जरिए। उदाहरण के लिए नोएडा में RWA की सहमति या मेहमानों के वेरिफिकेशन के बिना शॉर्ट-टर्म किराया सोसाइटी नियमों का उल्लंघन हो सकता है, भले ही कोई सीधा बैन न हो। बेंगलुरु में एसोसिएशन अपने नियमों से शॉर्ट स्टे सीमित कर सकती हैं या पहले से अनुमति मांग सकती हैं।
इसलिए हर जगह सुरक्षित तरीका एक ही है: साफ रेजोल्यूशन पास करें, उसे बायलॉज में दर्ज करें और सब पर बराबर लागू करें। शुरू करने से पहले अपने राज्य का अपार्टमेंट या को-ऑपरेटिव कानून देख लें।
वैध बैन कैसे पास करें, कदम दर कदम
कोर्ट प्रक्रिया देखते हैं। यह क्रम आपके रेजोल्यूशन को सबसे अच्छा मौका देता है:
- गतिविधि को साफ परिभाषित करें: मान लीजिए 30 दिन से कम का ठहराव, या बुकिंग प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड कोई भी फ्लैट, या प्रति रात भुगतान करने वाले मेहमान।
- प्रस्ताव को जनरल बॉडी मीटिंग के एजेंडा में रखें और बायलॉज के अनुसार नोटिस भेजें।
- जरूरी बहुमत से रेजोल्यूशन पास करें और मिनट्स में ठीक से दर्ज करें।
- बायलॉज में संशोधन करें और उसे रजिस्टर्ड कराएं, ताकि नियम आपके स्थायी दस्तावेज का हिस्सा बने।
- तय करें कि जो सदस्य पहले से शॉर्ट-स्टे फ्लैट चला रहे हैं उनका क्या होगा। उचित नोटिस अवधि विवाद घटाती है।
- फ्लैट किराए पर देने वाले हर सदस्य से किराएदार का ब्योरा और पुलिस वेरिफिकेशन लें, जैसा ज्यादातर सोसाइटियां पहले से करती हैं।
आपकी कमेटी को आगे क्या करना चाहिए
पहले यह पता करें कि आपकी इमारत में कोई फ्लैट शॉर्ट स्टे के लिए इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। गेट रिकॉर्ड, पार्सल और डिलीवरी का पैटर्न और पड़ोसियों की शिकायतें आमतौर पर बता देती हैं। दूसरा, कार्रवाई से पहले सदस्य से बात करें। कई मामले लिखित नोटिस और नियम की याद दिलाने से ही खत्म हो जाते हैं। तीसरा, हर शिकायत, नोटिस और जवाब का कागजी रिकॉर्ड रखें, क्योंकि मामला को-ऑपरेटिव कोर्ट पहुंचा तो यही काम आएगा।
जो सोसाइटी प्रक्रिया का पालन करती है, फैसला दर्ज करती है और हर सदस्य से एक जैसा व्यवहार करती है, वह पहले बैन करके बाद में ड्राफ्ट करने वाली सोसाइटी से कहीं बेहतर स्थिति में होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या RWA या हाउसिंग सोसाइटी भारत में Airbnb बैन कर सकती है?
हां, वैध जनरल बॉडी रेजोल्यूशन और बायलॉज संशोधन के जरिए। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शॉर्ट-टर्म रेंटल को सीमित करने वाले सोसाइटी के रेजोल्यूशन को बरकरार रखा है। किसी तरफ कोई राष्ट्रीय कानून नहीं है, इसलिए स्थिति आपके राज्य के कानून और रजिस्टर्ड बायलॉज पर निर्भर करती है।
क्या मैनेजिंग कमेटी जनरल बॉडी मीटिंग के बिना Airbnb बैन कर सकती है?
नहीं। स्थायी बैन जनरल बॉडी से आना चाहिए, और बायलॉज में संशोधन होकर रजिस्टर्ड होना चाहिए। सिर्फ कमेटी का फैसला सदस्य के लिए चुनौती देना आसान बना देता है।
क्या यह बैन सामान्य किराएदारों को भी रोकता है?
नहीं। शॉर्ट स्टे पर रोक किराएदारों पर रोक से अलग है। लंबी अवधि के किराएदार सोसाइटी को ब्योरा देकर और नॉन-ऑक्यूपेंसी चार्ज के साथ रह सकते हैं, जो महाराष्ट्र में सर्विस चार्ज के 10% तक सीमित है।
क्या फ्लैट से Airbnb चलाने के लिए सोसाइटी का NOC चाहिए?
अगर आपके बायलॉज या जनरल बॉडी रेजोल्यूशन शॉर्ट स्टे को सीमित करते हैं, तो हां, और सोसाइटी मना कर सकती है। अगर अभी कुछ लिखा नहीं है, तो बॉम्बे हाईकोर्ट मान चुका है कि जनरल बॉडी ऐसे इस्तेमाल को सीमित कर सकती है, इसलिए अनौपचारिक रूप से मना करने के बजाय इसे जनरल बॉडी मीटिंग में ले जाएं।
सदस्य बैन को कहां चुनौती दे सकता है?
महाराष्ट्र में MCS एक्ट की धारा 91 के तहत को-ऑपरेटिव कोर्ट में। बॉम्बे हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने कहा है कि को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के खिलाफ रिट याचिका चलने योग्य नहीं है, क्योंकि सोसाइटी एक निजी संस्था है।
SocietyBee में देखें
आधिकारिक और संदर्भ स्रोत
- Challenging ban on Airbnb by Cooperative Housing Society? Bombay HC says: Writ Not Maintainable, SCC Online
- Bombay High Court Rules on Airbnb in Housing Societies & BMC Regulations, Real Estate Law Journal
- Airbnb Ban in Society: Rules, Rights & Legal Guide, LawCrust
- Airbnb Rentals in Noida Under Scrutiny: RWAs & Police Tighten Rules, NCR Guide
Yogesh Randive
संस्थापक, SocietyBee
योगेश ने मुंबई की हाउसिंग सोसाइटियों को एक्सेल में हिसाब-किताब संभालने में मदद करते हुए कई साल बिताए, उसके बाद SocietyBee बनाया। वे महाराष्ट्र सहकारी कानून, सोसाइटी अकाउंटिंग और भारत में हाउसिंग सोसाइटी चलाने की व्यावहारिक चुनौतियों के बारे में लिखते हैं।